HATHUA RAAJ
आज हम बात कर रहे है बिहार के एक ऐसे रियासत की जिसने मराठों से ज्यादा बिहार में अंग्रेजों का नुकसान किया। हथुआ राज बिहार का वो रियासल है जिसका संबंध भारत के सबसे पुराने राज घराने बधोचिया से है। छपरा, सीवान, गोपालगंज के 1300 से अधिक गॉव इस रियासत के अन्दर आते थे। 2600 साल तक बिहार के भोजपुर और यूपी के पूर्वांचल मेंं इस राज घराने ने राज किया।
हथुआ राज का उचित इतिहास हमे नही मिलता क्योकि राजा फतेह बहादुर शाही ने जब अंग्रेजों के खिलाफ विद्रोह किया तो अपने रियासत का इतिहास अपने साथ ले गये और उसे नष्ट कर दिया। लेकिन इतिहास बताता है कि राजा जयमल ने चौंसा की लड़ाई में हूमायूं की मदद की थी। बक्सीस में हूमायूं ने राजा जय मल के पोते को हुस्सेपुर, कल्याणपुर, बलचौरा और हथुआ परगना की जागिरे दे दी थी।
हथुआ राज का पैलेश आज भी आर्कषण का केन्द्र है। हथुआ राज का बनाया थावे मंदिर आज भी आर्कषण का केन्द्र है। यहॉ आज भी देश-विदेश से सैलानी दर्शन करने आते है। भारत जब स्वतंत्र हुआ तो पटना में हथुआ राज ने हथुआ बाजार लगवा दिया। छपरा में भी इसी तर्ज पर हथुआ मार्केट बना है। हथुआ राज ने लोक कल्याण में न जाने कितनी ही जमीने दान मेंं दे दी। हथुआ राज की भव्यता आज भी बिहार की शान में चार चान्द लगा देता है तो जाईये और इस पोस्ट को अपने मित्रों और संबंधियोंं को शेयर कर आप भी बिहार गुणगान कीजिए। जय हथुआ, जय बिहार, जय भारत.......
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